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ओबीसी जनगणना और जातियों को यूनिक कोड देने की मांग, कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग ने निकाला मार्च

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ओबीसी जनगणना और जातियों को यूनिक कोड देने की मांग, कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग ने निकाला मार्च

कोरबा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जयहिंद एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेश अध्यक्ष केशव चंद्राकर के निर्देशानुसार जिला कांग्रेस कमेटी कोरबा शहर एवं ग्रामीण पिछड़ा वर्ग विभाग द्वारा ओबीसी जनगणना सहित विभिन्न मांगों को लेकर मार्च निकाला गया।

 

कोसाबाड़ी चौक कोरबा से कलेक्टर कार्यालय तक आयोजित इस मार्च में कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं पिछड़ा वर्ग समाज के लोगों ने भाग लिया। इस दौरान जनगणना प्रपत्र में ओबीसी के लिए अलग कॉलम जोड़ने, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग की जातियों की वैज्ञानिक तरीके से जनगणना कराने तथा प्रत्येक जाति को अलग यूनिक कोड प्रदान करने की मांग उठाई गई। मार्च के बाद महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम जिला कलेक्टर कोरबा के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।

कार्यक्रम में प्रदेश उपाध्यक्ष पिछड़ा वर्ग कांग्रेस श्याम सुंदर सोनी, जिला कांग्रेस कमेटी कोरबा शहर अध्यक्ष मुकेश राठौर, जिला कांग्रेस कमेटी कोरबा ग्रामीण अध्यक्ष मनोज चौहान, पिछड़ा वर्ग कांग्रेस कोरबा शहर जिलाध्यक्ष गजानंद प्रसाद साहू, ग्रामीण जिलाध्यक्ष राजेश मानिकपुरी, नगर पालिक निगम कोरबा के नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, पूर्व जिला अध्यक्ष नाथूराम यादव एवं ओबीसी महासभा के जिलाध्यक्ष नकुल राजवाड़े प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

इसके अलावा संतोष राठौर, गोरेलाल यादव, दुष्यंत शर्मा, प्रेमलाल साहू, आरिफ खान, गणेशदास महंत, कार्तिक राम केवट, राजाराम जायसवाल, मनहरण राठौर, जवाहर लाल, सत्व प्रकाश साहू एवं रामकुमार कौशिक सहित अनेक पदाधिकारी शामिल हुए।

कोरबा ग्रामीण क्षेत्र से ब्लॉक अध्यक्ष रामगोपाल यादव (कटघोरा), रामदुलार कश्यप (हरदीबाजार), पवन सिंह यादव (दीपका), बजरंग दास (बांकी मोंगरा), निरंजन श्रीवास (बरपाली) एवं सपूरन दास महंत (करतला) सहित जिला महामंत्री संतोष दास महंत, गोपाल श्रीवास, उमेश दास, जगमोहन दास, संत चौहान, पुरुषोत्तम साहू, नोहर दास एवं जय सिंह पटेल भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं, पिछड़ा वर्ग समाज के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता रही। मार्च के माध्यम से जनगणना में पिछड़ा वर्ग की जातिगत पहचान एवं उनकी जनसंख्या का वैज्ञानिक आंकड़ा सुनिश्चित करने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।

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