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शराबबंदी की मांग को लेकर लगातार कलेक्ट्रेट पहुंच रहे ग्रामीण, आखिर कब सुनेगी सरकार

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शराबबंदी की मांग को लेकर लगातार कलेक्ट्रेट पहुंच रहे ग्रामीण, आखिर कब सुनेगी सरकार

कोरबा जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से शराबबंदी और अवैध शराब बिक्री पर रोक लगाने की मांग को लेकर ग्रामीण लगातार कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिकायतें कर रहे हैं। आवेदन पर आवेदन दिए जा रहे हैं, ग्रामीण अपनी पीड़ा प्रशासन के सामने रख रहे हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन शिकायतों पर सुनवाई कब होगी?

शराब के कारण कई परिवारों का सुख-चैन प्रभावित होने का आरोप है। महिलाएं परेशान हैं, युवा भटक रहे हैं और बच्चों के भविष्य को लेकर अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा है।

आबकारी विभाग से लेकर पुलिस प्रशासन तक सवाल

ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद यदि अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आबकारी विभाग आखिर क्या कार्रवाई कर रहा है? पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

जब लगातार शिकायतें कलेक्ट्रेट तक पहुंच रही हैं, तो क्या उन शिकायतों की जमीनी स्तर पर जांच हो रही है? यदि कार्रवाई हुई है तो उसका असर गांवों में क्यों नजर नहीं आ रहा?

मंत्री से भी जनता की उम्मीदें

शराबबंदी को लेकर ग्रामीण अब जनप्रतिनिधियों और मंत्री की ओर भी उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। जनता का सवाल सीधा है—जब गांव की महिलाएं और परिवार शराब के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, तो उनकी आवाज आखिर कौन सुनेगा?

क्या सिर्फ आवेदन लेना ही प्रशासन की जिम्मेदारी है, या शिकायतों के बाद कार्रवाई करना भी जरूरी है?

आखिर शराबबंदी की जिम्मेदारी किसकी?

ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी से लड़ाई नहीं चाहते, वे सिर्फ अपने परिवार और बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल चाहते हैं। सवाल सिर्फ शराब की बिक्री का नहीं, बल्कि उन परिवारों के भविष्य का है जो इसकी वजह से परेशान होने का दावा कर रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है

शराबबंदी और अवैध शराब पर रोक लगाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? आबकारी विभाग की, पुलिस प्रशासन की, जनप्रतिनिधियों की या सरकार की?

कलेक्ट्रेट में शिकायतें लगातार पहुंच रही हैं अब देखना यह है कि इन शिकायतों की आवाज शासन-प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों तक कब पहुंचती है और कार्रवाई कब होती है।

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