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फोरलेन सड़क निर्माण पर उठे सवाल, गरीबों के आशियाने उजड़ने की चिंता श्याम नारायण सोनी

 

जरूरी, लेकिन गरीबों को नुकसान पहुंचाकर नहीं

कोरबा। बालको क्षेत्र में बजरंग चौक परसाभांठा से टाटा मोटर्स तक प्रस्तावित फोरलेन सड़क निर्माण को लेकर अब प्रभावित होने वाले दुकानदारों और परिवारों की चिंता सामने आने लगी है। कोरबा लोकसभा युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष श्याम नारायण सोनी ने इस मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सड़क निर्माण परियोजना से जुड़ी समस्याओं से अवगत कराया है। उन्होंने शासन-प्रशासन और बालको प्रबंधन से मांग की है कि सड़क निर्माण की योजना बनाते समय वर्षों से वहां रह रहे गरीब परिवारों और छोटे व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाए।

श्याम नारायण सोनी के अनुसार, बजरंग चौक परसाभांठा से टाटा मोटर्स तक लगभग 2.20 किलोमीटर लंबी सीसी फोरलेन सड़क के निर्माण के लिए 29.98 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है। उनका कहना है कि जानकारी के मुताबिक, बालको प्रबंधन ने निर्माण के लिए जिला प्रशासन को राशि उपलब्ध करा दी है। इसके बाद जिला प्रशासन ने निर्माण कार्य की जिम्मेदारी नगर पालिक निगम कोरबा को सौंपी है और निगम की ओर से निविदा प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

घनी आबादी के बीच सड़क निर्माण से दुकानदारों को चिंता

सोनी ने कहा कि बजरंग चौक से टाटा मोटर्स तक सड़क के दोनों ओर घनी आबादी बसी हुई है। यहां सैकड़ों दुकानें और मकान हैं, जहां छोटे व्यापारी वर्षों से अपना व्यवसाय कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। बालको संयंत्र की स्थापना के समय से ही कई छोटे दुकानदार क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास में अपनी भूमिका निभाते आ रहे हैं।

ऐसे में फोरलेन सड़क निर्माण की योजना से प्रभावित होने की आशंका ने दुकानदारों और स्थानीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सोनी का कहना है कि यदि सड़क निर्माण से पहले प्रभावित लोगों को योजना की स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती और उनकी समस्याओं को सुने बिना आगे बढ़ा जाता है, तो इससे गरीब परिवारों और छोटे व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी तथा आवास का संकट खड़ा हो सकता है।

जब दोनों ओर दो लेन सड़क, तो बीच में फोरलेन क्यों?

श्याम नारायण सोनी ने सड़क निर्माण की आवश्यकता और प्रस्तावित चौड़ाई पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि मेजर ध्यानचंद चौक, रुमगरा से बजरंग चौक तक दो लेन सड़क निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। वहीं, टाटा मोटर्स से रिसदी चौक तक भी दो लेन सड़क बनाई जा रही है। ऐसे में बजरंग चौक से टाटा मोटर्स तक लगभग 2.20 किलोमीटर के हिस्से में फोरलेन सड़क बनाने की जरूरत पर उन्होंने पुनर्विचार करने की मांग की है।

उनका कहना है कि जब आसपास के मार्गों को दो लेन के रूप में विकसित किया जा रहा है, तो घनी आबादी वाले इस हिस्से में फोरलेन निर्माण के विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए। यदि मौजूदा सड़क को बेहतर बनाकर यातायात सुगम किया जा सकता है, तो ऐसा विकल्प अपनाया जाए, जिससे स्थानीय लोगों के मकान और दुकानें कम से कम प्रभावित हों।

विकास के साथ गरीबों के हितों की रक्षा की मांग

सोनी ने कहा कि वे सड़क निर्माण के विरोध में नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि विकास कार्य ऐसा हो, जिससे आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। यदि बालको प्रबंधन को अपने वाहनों के सुगम आवागमन के लिए अतिरिक्त या वैकल्पिक मार्ग की आवश्यकता है, तो स्थानीय लोगों को विश्वास में लेकर और उनकी सहमति से दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

 

उन्होंने मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन, नगर निगम और बालको प्रबंधन से अपील की है कि सड़क निर्माण परियोजना पर अंतिम निर्णय लेने से पहले प्रभावित दुकानदारों और परिवारों की समस्याओं को सुना जाए। साथ ही, परियोजना की जानकारी सार्वजनिक कर उचित संवाद और आवश्यक प्रक्रिया के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।

“निर्माण आवश्यक है, लेकिन गरीबों की कीमत पर नहीं”

श्याम नारायण सोनी का कहना है कि विकास कार्यों का उद्देश्य जनता को बेहतर सुविधाएं देना होना चाहिए। सड़क निर्माण से यातायात व्यवस्था बेहतर हो, यह जरूरी है, लेकिन इसके साथ वर्षों से बसे छोटे व्यापारियों और गरीब परिवारों के घरों तथा रोजगार पर पड़ने वाले प्रभावों को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि ऐसी योजना बनाई जाए, जिससे सड़क का विकास भी हो और स्थानीय लोगों के आशियाने तथा आजीविका भी सुरक्षित रह सकें।

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