दादर में मुख्य अतिथि के आने से पहले ही आतिशबाजी के बीच धू-धू कर जला रावण, हजारों की भीड़ रह गई हैरान
कोरबा, छत्तीसगढ़। दशहरा पर्व पर बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक रावण दहन देखने के लिए दादर में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल था। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में रावण दहन का नजारा देखने पहुंचे थे। लोगों के चेहरे पर उत्साह था और हर कोई उस खास पल का इंतजार कर रहा था, जब विधिवत रूप से रावण के पुतले का दहन किया जाना था। लेकिन इस बार दादर में कुछ ऐसा हुआ, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुख्य अतिथि के आगमन का इंतजार किया जा रहा था। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। वहीं, दशहरा उत्सव को और भी खास बनाने के लिए जगराता कार्यक्रम का आयोजन भी रखा गया था। धार्मिक माहौल, लोगों की भीड़ और पर्व को लेकर उत्साह के बीच पूरा क्षेत्र उत्सवमय नजर आ रहा था। दूर-दराज से पहुंचे लोग अपने परिवार और परिचितों के साथ इस आयोजन का आनंद लेने पहुंचे थे।
इसी बीच आतिशबाजी के दौरान अचानक रावण के पुतले में आग लग गई और देखते ही देखते रावण धू-धू कर जलने लगा। खास बात यह रही कि मुख्य अतिथि के पहुंचने से पहले ही रावण का पुतला जल उठा। जिस पल का हजारों लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, वह पल निर्धारित समय से पहले ही सामने आ गया। अचानक रावण को जलता देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। लोगों को समझने का मौका भी नहीं मिला कि आखिर यह सब कैसे हो गया।
मैदान में मौजूद लोगों के बीच यह घटना चर्चा का विषय बन गई। कोई इस घटनाक्रम को देखकर आश्चर्य जता रहा था, तो कोई आपस में चर्चा कर रहा था कि आखिर मुख्य अतिथि के आने और विधिवत रावण दहन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही पुतले में आग कैसे लग गई। दशहरा उत्सव में शामिल होने पहुंचे लोगों की निगाहें रावण के पुतले पर टिक गईं और कुछ ही देर में यह घटनाक्रम पूरे आयोजन की सबसे चर्चित बात बन गया।
दशहरा पर्व पर रावण दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश भी देता है। हर साल लोग इस परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं। खासकर बच्चों में रावण दहन को लेकर अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। दादर में भी इसी उत्साह के साथ लोग कार्यक्रम में पहुंचे थे, लेकिन मुख्य अतिथि के आने से पहले ही रावण का जल उठना लोगों के लिए अप्रत्याशित घटनाक्रम बन गया।
इस घटना के बाद आयोजन की तैयारियों और रावण दहन के समय को लेकर भी सवाल उठने लगे। आखिर आतिशबाजी के दौरान पुतले में आग कैसे लगी? क्या रावण दहन की निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही आग लग गई थी? और क्या इस तरह की स्थिति से बचने के लिए पर्याप्त सावधानियां बरती गई थीं? इन सवालों पर आयोजन से जुड़े लोगों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
दशहरा जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजन में हजारों लोगों की मौजूदगी के कारण सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए आयोजन स्थल पर काफी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पाटले और नगर पुलिस अधीक्षक प्रतीक चतुर्वेदी ने स्वयं मोर्चा संभाला था। आतिशबाजी और रावण दहन के दौरान समय का ध्यान रखने के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस बल लगातार तैनात रहा।
फिलहाल, दादर में मुख्य अतिथि के पहुंचने से पहले आतिशबाजी के बीच रावण का जल उठना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जिस रावण दहन को देखने के लिए हजारों लोग दूर-दूर से पहुंचे थे, उसी आयोजन में पुतले का समय से पहले जलना सभी के लिए हैरानी भरा रहा। इस बार दादर का दशहरा उत्सव अपने धार्मिक आयोजन, जगराता और रावण दहन से पहले हुए इस अप्रत्याशित घटनाक्रम को लेकर सुर्खियों में आ गया।
लोक पल्स न्यूज़, कोरबा, छत्तीसगढ़
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